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मथुरा वृन्दावन बृज की होली कब है: ब्रज होली का महत्व और कैसे मनाई जाती है

यूं तो पूरे भारत देश में जगह जगह पर होली मनाई जाती है. लेकिन वृन्दावन बृज की होली की तो बात ही निराली है. होली के दिन पूरे बृज को लाल और पीले रंगो से सजाया जाता हैं. आपको बता दे कि बृज में होली पूरे 40 दिन मनाई जाती है. इस होली के रंग में रंगने के लिए कोई भी अपने को रोक नहीं पाता. बड़ी तादात में लाखो लोग दूर दूर से आते है. कान्हा की नगरी वृन्दावन बृज की होली पूरे देश की सबसे अलग और अनूठी होली होती है. बृज में होली का शुभारंभ कान्हा जी को गुलाल का टीका लगाकर किया जाता है. तो आइए हम आपको बताते है कि आखिर कैसे होती है वृन्दावन बृज की होली

Holi 2025: राधा कृष्ण होली कोट्स हिंदी में

Vrindavan Holi 2025

Vrindavan Holi 2025 वृन्दावन और बरसाना की होली पूरी दुनियाभर में प्रसिद्ध है. बताया जाता है कि राधा-कृष्ण गोपियों के साथ खेलते थे. आपको बता दे कि बृज धाम में केवल रंगों से ही नहीं, बल्कि कई अन्य तरह से भी होली खेली जाती है. इस त्यौहार का इंतजार सिर्फ बृज के लोग ही नहीं अपितु देश के सभी श्रद्धालु को रहता है. इस दिन सभी लोग भाईचारे आपसी प्यार और सद्भाव को भी बढ़ावा देते है. अगर आप भी Vrindavan Holi 2025 को देखना चाहते है ,तो आप  रंगभरी एकादशी को यहां जरूर जाए.

Mathura Vrindavan Braj Holi

वृन्दावन होली कब है  

अब आपको बताते है कि वृन्दावन होली कब है. तो आपको बता दे कि 21 मार्च 2025 दिन गुरुवार को वृन्दावन के बांके बिहारी मंदिर में फूलवालों की होली मनाई जाएगी. वही इसी के साथ रंगभरी एकादशी पर वृन्दावन में होली मनाई जाएगी. यह होली वृंदावन के  बांके बिहारी मंदिर में मनाई जाती है. इस मंदिर की  मान्यता पूरे देश में है .इसे दुनिया में भगवान कृष्ण का सबसे पवित्र और सबसे प्रसिद्ध मंदिर माना गया है. यह  बांके बिहारी का मंदिर शाम करीब 4 बजे खुलता है. आपको प्रवेश के लिए जल्दी पहुंचने की सलाह दी जाती है .क्योंकि बड़ी तादात में यह श्रद्धालु बांके बिहारी श्री कृष्ण की पूजा करने आते हैं.

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वृन्दावन में होली कैसे मनाई जाती है

वैसे होली एक ऐसा त्यौहार है जो कि सब जगह अलग अलग तरह से मनाई जाती है. क्या आप यह जानते है कि वृन्दावन में होली कैसे मनाई जाती है. तो आपको बता दे कि जब मथुरा वृंदावन में होलिका दहन होता है, तो इस दिन यहां फूलों वाली होली मनाई जाती है. इस दिन बांके बिहारी मंदिर के पट खोल दिए जाते है. सभी दूर दूर से आए श्रद्धालु बांके बिहारी के दर्शन कर फुल चढ़ाते है. पूरा वृंदावन फूलों से सजाया जाता है. लोग भजन के साथ साथ झूमते हुए नजर आते हैं. एक दुसरे को विविध रंगों से रंगकर नाचते गाते हुए दिखाई देते है.

बांकेबिहारी के भव्य मंदिर में रंग की होली रंगभरनी एकादशी से शुरू होती है. ठाकुर जी को लगाने के लिए एक टेसू के फूलों से खास तरह का रंग तैयार किया जाता है. जिसे केवल ठाकुर जी को हो चढ़ाया जाता है.

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वृन्दावन होली का महत्व

होली का पावन पर्व पूरे भारतवर्ष में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी धूम धाम से मनाया जाता है. लेकिन सबसे खास बात तो यह कि यहां मथुरा वृन्दावन होली का अपना अलग ही महत्व है . तो आइए अब जानते है कि वृन्दावन होली का महत्व क्या है. आपको बता दे कि जब बसंत पंचमी आती है तभी से यहां के लोग होली के रंगो में रंगना शुरू कर देते है. शास्त्रों में माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था और उन्होंने अपना बचपन वृन्दावन में बिताया था. कुछ पौराणिक कथाओं के आधार श्री कृष्ण अपनी मां यशोदा के पास जाकर राधा के गोरे होने की शिकायत करते है , साथ ही वह कहते है की मैं क्यों सांवला हूं. इसी के चलते उनकी मां यशोदा ने उन्हें राधा पर रंग लगाने के लिए कहती है. इसीलिए भगवान कृष्ण और उनके दोस्त राधा और अन्य गोपियों पर रंग लगाने के लिए राधा के गांव बरसाना गए. गोपियाँ इस खेल खेल में उन पर लाठियों से प्रहार करती थीं. जिसके चलते यह एक परम्परा ही बन गई , जो कई वर्षों से चली आ रही है और यही कारण है कि आज भी यहां लठमार होली मनाई जाती है.

वही वृन्दावन में होली के दिन बांके बिहारी मंदिर में होली से पहले एकादशी को फूलों वाली होली मनाई जाती है. यह होली पारंपरिक रंगों से अलग फूलों के साथ मनाई जाती है. हजारों श्रद्धालु बांके बिहारी की केवल एक झलक से मंत्रमुग्ध हो जाते है. दर्शन के लिए  मंदिर के द्वार शाम 4 बजे के आसपास खोले जाते हैं और तभी पुजारी दूर दूर से आए सभी श्रद्धालु पर फूलो की बरसात कर देते है. यह भव्य वातावरण एक भक्त को वृंदावन की तरफ हर साल खींच कर ले आता है.

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